डायरी सी कुछ....
जल्द ही Pondicherry पहुच गया... दिन इस खूबसूरत जगह को देखने में चला गया... काश यहाँ मैं अकेला होता.. शांत.. बिना हिसाब किताब का कुछ... झड़ता रहता...। आँखें देख चोंक नहीं पड़ता.. आहट सुनकर पलटता नहीं फिरता... चलता नहीं, टहलता फिरता... गुम जाने सा पास...
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मानव
अपने से..
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[29 Dec 2009 01:05 AM]



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