कबीर के श्लोक -३

*साधना* कबीर ऐसा एक आधु,जो जीवत मिरतकु होइ॥निरभै होइ के गुन रवै,जत पेखऊ तत सोइ॥५॥कबीर जी कहते है कि इस संसार मे कोई बिरला ही होता है जो अपने जीवन को इस तरह जीए जैसे कोई जीवत व्यक्ति किसी मरे हुए के समान इस संसार से संबध रखता है।निरभय हो कर सुख और दुख से ऊपर... [पूरी पोस्ट]
writer परमजीत बाली

अध्यात्मिक

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[28 Dec 2009 15:23 PM]

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