तू और मैं ....
मेरे स्वप्नो की छाया में रमी हुई मेरी स्मृतियों में बसी सांसो के धागो में बंधी तू...! और मै.......?? तेरी छाया के पीछे दौड़ता एक व्याकुळ, आकुल, बेबस पथिक मात्र हू..! तू अपने ह्र्दय की फुलवारी में किसी और की सोचे बुन रही है तेरी छटपटाहट मेरे लिए नही ह...
[पूरी पोस्ट]
अनामिका की सदाये......
29
7
0
7
18
[28 Dec 2009 13:04 PM]



Shuffle








