"ख्वाबो की बरसाते बुनती हुं"

कुछ लम्हे ख्वाबो की बरसाते बुनती हुं" रात के पहरों की सोगातें चुनती हुं उलझे से ख्वाबो की बरसाते बुनती हुं घुप अँधियारा , नींद उचटती , करवट करवट रूह तडपती, दीवारों की गुप चुप आवाजे सुनती हुं उलझे से ख्वाबो की बरसाते बुनती हुं छत पर सरकते धुंधले साये अनबुझ आक्र... [पूरी पोस्ट]
writer seema gupta
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[27 Dec 2009 22:26 PM]

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