हमसफर के लिए
मिले थे राह में अचानक कुछ पहर के लिए बसा लिया है तुझे दिल में उम्र भर के लिए बेचैन निगाहों से नजरें जहाँ मिलीं देखा कि इक तड़प है हमसफर के लिए अनजान ही मिले थे, दिल का पता मिला बन जाऊँ खत मैं खुद ही इक असर के लिए बस तीरगी थी अबतक रौशन हुआ जहाँ क्यों...
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श्यामल सुमन
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[27 Dec 2009 21:43 PM]



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