भूकंप
डा. कर्मजीत सिंह नडाला बेटा सोलह वर्ष का हुआ तो वह उसे भी अपने साथ ले जाने लग पड़ा। ‘कैसे हाथ-पाँव टेढ़े-मेढ़े कर चौक के कोने में बैठना है, आदमी देख कैसे ढ़ीला-सा मुँह बनाना है। लोगों को बुद्धू बनाने के लिए तरस का पात्र बनकर कैसे अपनी ओर आकर्षित करना...
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दीपशिखा
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[27 Dec 2009 21:03 PM]



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