इन्सान बने रहना … इतना मुश्किल तो नहीं?!

खाकी में इंसान एक बँधी हुई लीक और सामन्ती मर्यादा के गोल-गोल दायरे… इन्हीं पर चलते हैं लोग चलने की सीख देते हैं लोग!   किन्तु… बँधी हुई लीक को तोड़ना- सामन्ती मान-मर्यादाओं के दायरे से बाहर आना और एक इन्सान के नजरिए से सोचना…   मेरा कहना है- पुलिस की वर्दी... [पूरी पोस्ट]
writer अशोक कुमार
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[27 Dec 2009 19:01 PM]

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