त्रिवर्ग सिद्धान्त

धर्म, अर्थ (सम्पति), काम (इच्छा) धर्मार्थावुच्यते श्रेयः कामार्थो धर्म एव च। अर्थ एवेह वा श्रेयस्त्रिवर्ग इति तु स्थिति॥ परित्यजेदर्थकामो यो स्याता धर्म वर्जितो । कुछ लोगो का कहना है कि कल्याण एव सुख्-सन्तोष की प्राप्ति के लिऍ धर्म और श्रेयस्कर है, अ... [पूरी पोस्ट]
writer HEY PRABHU YEH TERA PATH

धर्म

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[27 Dec 2009 18:45 PM]

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