राजभवन में राज हुआ है......
दुनिया एक कसाई बाडा, कत्ल यहाँ अरमानों का, देख यहाँ पर सौदा होता, निसदिन ही मुस्कानों का। तेज हवायें क्या कर लेंगी, मेरे मन की कश्ती का हमने तो बचपन से सामना, रोज किया तूफानों का। जब विकास की ज़द में आईं, सड़कें छाती चढ़ बैठीं नगरी में बिछ गया जाल, ब...
[पूरी पोस्ट]
योगेन्द्र मौदगिल
ग़ज़ल
38
4
0
4
21
[27 Dec 2009 18:44 PM]



Shuffle








