राजभवन में राज हुआ है......

योगेंद्र मौदगिल दुनिया एक कसाई बाडा, कत्ल यहाँ अरमानों का, देख यहाँ पर सौदा होता, निसदिन ही मुस्कानों का। तेज हवायें क्या कर लेंगी, मेरे मन की कश्ती का हमने तो बचपन से सामना, रोज किया तूफानों का। जब विकास की ज़द में आईं, सड़कें छाती चढ़ बैठीं नगरी में बिछ गया जाल, ब... [पूरी पोस्ट]
writer योगेन्द्र मौदगिल

ग़ज़ल

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[27 Dec 2009 18:44 PM]

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