काश के चाँद मेरी शर्ट का बटन होता

कुछ पन्ने मेरी दराज़ से.... काश के चाँद मेरी शर्ट का बटन होता, मैं रो़ज़ उससे तोड़ता तू रोज़ उसे सीती. यूँही सिलसिला सालों चलता, ये अमावस यूँही इतनी लम्बी न हुई होती.... मखमली पंखुडी गुलाब की गर पलकों पे न सजी होती तेरे, नज़रें हमसे भी किसी रोज़ टकराई होतीं यूँ काटों में न फंसी... [पूरी पोस्ट]
writer ●๋• नीर ஐ

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[27 Dec 2009 13:13 PM]

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