ईमां मुझे रोके है तो खींचे है मुझे कुफ्र...

अमाँ यार..... सालगिरह के दिन ( २७ दिसंबर ) मिर्ज़ा असदुल्लाह ग़ालिब को याद करने की वजह सिर्फ इतनी नहीं की हिन्दुस्तानी अदब के हज़ारों शैदाई उन्हें खुदा - ए - सुखन के खिताब से नवाजते हैं . हकीकी मायनों में मिर्ज़ा ग़ालिब मुल्क में शायर और शायरी दोनों के पर्याय हैं . ये... [पूरी पोस्ट]
writer हिमांशु बाजपेयी
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[27 Dec 2009 12:57 PM]

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