आज सब कह दो..
मेरी सोचो को थोड़ा आराम दे दो.. मुझ पर एक अपना एहसान दे दो.. बहुत झुलसाती है सोचे.. जब हालात तुम्हे सोचते है.. चीखती है रगे ..., जद्दो-जहद भी बदन तोड़ते है.. मुझे मेरी सोचो से ज़रा से फासले दे दो.. जो दिल में है वो कह दो.. मेरे सीने पे अपना सर रख के.....
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अनामिका की सदाये......
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[06 Mar 2009 05:25 AM]



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