प्रयाण...
दीपक मंद हो चला है टिमटिमाना धीमा हो गया है आयु का जल भी सूख चला है लौ की उपर उठने की शक्ति क्षीण है आंखो की ज्योति , शरीर की शक्ति , मस्तिष्क की विस्मृति , शमशान सा मौन, विकृति की नीरस शांति प्रयाण के लिये सब साजो - सामान जुटा चुकी है ! खांसी, दम घु...
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अनामिका की सदाये......
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[30 Nov 2009 12:39 PM]



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