प्रारब्ध

अनामिका...... चेहरे की झुर्रिया.. अपने निशाँ छोड़ने लगी है..!! मौत भी धीरे धीरे .. अपनी चादर फैलाने लगी है...!! क्षणिक सुखो की भावभरी शाखाये भी.. दारुड दुःख में.. सूख चली है..!! मगर..., आह.... ये प्रारब्ध.. हां.... ये निर्दयी प्रारब्ध पैशाचिक नृत्य करता हुआ.. क्षण... [पूरी पोस्ट]
writer अनामिका की सदाये......
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[12 Dec 2009 13:45 PM]

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