स्वांग भरी मुस्कान
दोस्तों , यह रचना मैंने हिंद - युग्म में युनिकवी की अक्तूबर माह की प्रतियोगिता में भेजी थी जिसे ११ वा स्थान प्राप्त हुआ था और आज इसे आप सब के बीच पेश कर रही हू ... उम्मीद है पसंद करेंगे । सब कुछ बिखरता जा रहा है लेखनी की सांसे टूटने लगी है .. सारे गम...
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अनामिका की सदाये......
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[23 Dec 2009 08:04 AM]



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