खलिश....
अजब खलिश है सीने में.. नम हर पोर है सीने में.. दग्ध भाव है.. सज़ल नयन है.. चित भाव विभोर है.. मर मर कर इस जीने में..!! ना अरमानो की छाव कही.. ना ख्वाबो के है पाँव कही.. ना सुख की भोर है नयनों में.. ना प्रेमालाप का राग कही..!! असहाए, दरिद्र सी उत्कंठा...
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अनामिका की सदाये......
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[25 Dec 2009 09:05 AM]



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