ब्लॉग्गिंग की सालगिरह (पुनरावलोकन) - 5

प्राची व उसके पार... उधार  आज कुछ रिश्तों से पुराना हिसाब हो , चलो !! प्रिये ,मैं आज वापिस करता हूँ तुम्हारी 'एक आंसू' की मुस्कान , दे दो तुम भी मुझे मेरे बालों से बनी गोल -गोल अंगूठियाँ तुम्हारी हर बात की चिंगोटीयाँ मगर उधार रही . दोस्त,वो रंगीन महफिलें याद हैं मैं... [पूरी पोस्ट]
writer दर्शन
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[27 Dec 2009 09:44 AM]

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