सर्दी के दोहे
शीतलहर के कोप का चला रात भर दौर धुंध ओढ़कर आ गयी भयाक्रांत सी भौर सूरज कोहरे में छिपा हुआ चांद सा रूप शरद ऋतु निष्ठुर हुई भागी डरकर धूप सूरज भी अफसर बना, है मौसम का फेर जाने की जल्दी करे और आने में देर दिन का रुतबा कम हुआ, पसर गयी है रात काटे से कटत...
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पवन *चंदन*
रात धूप चांद मौसम
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[27 Dec 2009 09:09 AM]



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