प्यार पपीहे का पावन तप है

साहित्य-सहवास प्यार को प्यार रहने दो व्यापार न बनाओ व्यापार बनाते हो तो प्यार मत जताओ क्योंकि प्यार लुटने का सोपान है और व्यापार लूटने का सामान है व्यवहार दोनों का भिन्न है इसीलिए दुनिया खिन्न है क्योंके उत्साह में आ कर अत्यन्त अतिरेक कर देती है और दो विपरीत धाराओ... [पूरी पोस्ट]
writer AlbelaKhatri.com
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[27 Dec 2009 06:28 AM]

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