जाड़े कि रातें
बड़े होने का दर्द आज इतना है कि याद आती हैं वो जाड़े कि रातें कभी रजाई तो कभी माँ का आँचल दादी कि कहानी वाली जाड़े कि रातें कभी सांप तो कभी भूतों वाली बातें बड़ी डरावनी भी थी जाड़े कि रातें जलाकर अलाव बैठती थी टोली अपनी नयी बदमाशियां सिखाती वो जाड़े...
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aarya
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[27 Dec 2009 05:51 AM]



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