कवि सम्मेलन में आज पेश हैं इकबाल के तीन नायाब शे'र

Kavi Sammelan राज़े - हस्ती राज़ है जब तक कोई महरम न हो खुल गया जिस दम तो मरहम के सिवा कुछ भी नहीं तेरे आज़ाद बन्दों की न ये दुनिया न वो दुनिया यहाँ मरने की पाबन्दी , वहां जीने की पाबन्दी मुझे रोकेगा तू ऐ नाखुदा क्या ग़र्क होने से कि जिनको डूबना हो , डूब जाते हैं स... [पूरी पोस्ट]
writer AlbelaKhatri.com
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[27 Dec 2009 01:52 AM]

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