’कान्त’ पत्थर वोट का संसद से चलाया जायेगा .... [गजल] - श्रीकान्त मिश्र ’कान्त’

तृषा'कान्त' तुम हमारे जख्म फिर से मत कुरेदो वक्त का मरहम हटाया जायेगा लहू से लोहित हुयी सरयू अभी मैली पड़ी आज क्या फिर से वही लोहू बहाया जायेगा तारीख़ के पन्नों से निकली धुंध फिर सबओर है राम को घर से हटाकर बाब़र बिठाया जायेगा उनको अब तो छोड़ दो दो जून रोटी के लि... [पूरी पोस्ट]
writer श्रीकान्त मिश्र ’कान्त’
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[27 Dec 2009 01:51 AM]

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