ये दर्द रोज कम होता जा रहा है !!
सूरज जल्दी-जल्दी डूब कर शाम कर दिया करेगा और शाम अपने तन्हाई वाले हाथ रखने के लिए मेरे कंधे नही तलाशा करेगी तमाम खीझ और उब के बावजूद आत्मा बार-बार लौटा करेगी वासना से लदी उसी सूजन वाले शरीर में जिसे घसीटते रहने में अब कोई उत्तेजना बाकी नही होगी बिना...
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ओम आर्य
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[26 Dec 2009 23:41 PM]



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