खत

सलाम करता चलूं मां,आशा है कि तुम ठीक होगी.मेरा ये है कि,जब तक सुबह बूढी नहीं होतीनींद अपनी पूरी उम्र जीती है.हर सुबहयहां की सर्दी कोगर्म पानी से पीटता हूं.गुनगुने पानी की धारऔरदूबली हो चुकी धूपतुम्हारी बात मानती होगी.धड-फड तैयार होता हूं.पर मां,आफिस फिर भी वक्त पर... [पूरी पोस्ट]
writer ritu raj
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[26 Dec 2009 14:30 PM]

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