ग़ज़ल

KALAM KA KARAZ मौला दर्द ज़माने भर का, ग़र मुझको मिल जाये तो , क्या बिगड़ेगा तेरा या रब, हर चेहरा खिल जाये तो ! लाशें खा खा थक गई होगी, ये धरती बहुत पुरानी है, हर रिश्ते को जीने का, अंदाज़ नया मिल जाये तो !! रंगों का बाज़ार ये दुनिया , न जाने क्यूँ वीरान लगे , बे रंग... [पूरी पोस्ट]
writer sanjeev kuralia
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[22 Dec 2009 01:45 AM]

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