अपने प्यारे पिता....स्वर्गीय श्री संत राम जी को समर्पित
अपनी सूरत मैं तेरी, सूरत नज़र आती है ! आईना धुंधलाता है,आँख छलक आती है ! रात को पेट पे, लेटते हुए ही सो जाना, कभी वो, पीठ की सवारी याद आती है ! हर बात मैं, बस रंग तेरा ही तलाशता हूँ हर आदत मैं, तेरी आदत झलक जाती है ! तेरे होते, किसी दोस्त की कमीं ना थ...
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sanjeev kuralia
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[26 Dec 2009 13:04 PM]



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