यह वहशी दुनिया तुम्हारे लायक नहीं थी रुचिका

chhammakchhallo kahis अरी बिटिया रुचिका, अच्छा हुआ, तुम सिधार गई. 19 साल बाद आज के इस हालात से तो बेहतर है कि तुम पहले ही चली गई. क्यों कहूं मैं कि तुम समाज से लड़ती रहो, कि समाज के सामने सर उठाकर चलो, कि समाज के डर से डरो मत, कि लोग तुम्हारा कुछ बिगाड़ नहीं सकते, कि कानू... [पूरी पोस्ट]
writer Vibha Rani
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[26 Dec 2009 07:29 AM]

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