मजदूरों की मजदूरी और पुलिस की लाठी
मुझे यह जानकारी संदीप जी के मेल से मिली. इस खबर को कोई अखबार या टीवी वाला तो दिखाएगा नहीं क्योंकि यहां उनके मालिकों का हित खतरे में है. लेकिन ब्लौग पर तो हम इसे पढ ही सकते है. यहां किसी का कुछ नहीं चलता है.) करावल नगर के बादाम मज़दूर पिछ्ले कुछ दिनों...
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विकास
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[26 Dec 2009 06:53 AM]



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