गिले -शिकवे

zakhm इक प्यासी रूह को सुकून कब मिला है घुटन की दलदल में फंसी ज़िन्दगी का यही सिला है चेहरे पर उभरती लकीरों में दर्द का ही सिलसिला है कुछ पल ठहर जाऊं कहीं ज़िन्दगी का बस यही गिला है... [पूरी पोस्ट]
writer वन्दना
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[26 Dec 2009 06:43 AM]

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