उसकी मुक़द्दस मोहब्बत !
दूर तक उड़ते हुए गर्म हवा के बवंडर हुआ करते और धूप वहाँ अपनी रूमानियत नहीं फैलाती थी। याद थी जो हर वक़्त उसके अक्स से लिपटी रहती । उन यादों को साथ ले अपनी चौखट पर खड़ी हो वो दूर तक तलाशती उस चेरे को । उन सभी पलों में इंतज़ार की लम्बी घड़ियाँ हुआ करती,...
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अनिल कान्त :
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[26 Dec 2009 05:20 AM]



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