उम्र की वो सौग़ात न होगी
अब पहले सी बात न होगी उम्र की वो सौग़ात न होगी खिलना खिल-खिल हँसना झिलमिल तारों के संग आँख-मिचौली दौड़म भागी, खींचातानी लड़ना रोना, हँसी-ठिठोली सच्चे-झूठे किस्सों के संग दादी की वो रात न होगी उम्र की वो सौग़ात न होगी खुले आसमां के नीचे होती थी सरगो़शी...
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मानसी
poetry
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[26 Dec 2009 02:50 AM]



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