मौत पर कुछ कवितायेँ : जसवीर अरोड़ा
एक हकीकत
मेरी लाश अभी आयी है
एक लाश और आ रही है
दूजी अधजली है
तीसरी की राख ठंडी पड़ चुकी है |
तैयारियां चल रही हैं
उस इंसानी जिस्म को फूँकने की-
जिसे हम अब तक रिश्तों से बुलाते थे |
सभी इंतजार में हैं
अर्थी को चिता पर रखते
लकडियों से उस ढ...
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अफ़लातून
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[26 Dec 2009 02:40 AM]



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