कुछ सोचना होगा....
अगर चाहोगे तुम जीना तो मरना सीखना होगा के मिट्टी के खिलौनों में भी जीवन फूंकना होगा हरे पेड़ों पे चलती आरियों को रोकलो वरना नयी नस्लों को खमियाजा़ यक़ीनन भोगना होगा परिन्दों को मुंडेरों पर जरा तुम चहचहाने दो स्वयं उड़ जायेंगें जब बिल्लियों से सामना ह...
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योगेन्द्र मौदगिल
ग़ज़ल
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[25 Dec 2009 18:41 PM]



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