सूरज अब नहीं नहाता
सूरज अब नहीं नहाताधूप जैकेट पहनके आताधूप की गहराई अब कम हो गई हैसर्दी की डर सेभागी फिरती हैशाम पसर जाती हैदिनसे ही.कोहरे की शोरतडके शाम सेभोर तक.हाथ में थामे चाय की प्यालियों सेधुआं निकलता है.गर्दन में शाल लपेटेया गुलबन्द बांधेबसों मे लोग.कोहरों की श...
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ritu raj
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[25 Dec 2009 12:55 PM]



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