एक स्त्री की लेखनी का स्पर्श चीजों के मायने बदल देता है

कर्मनाशा आज बड़ा दिन है। अब तो कुछ ही देर में 'है' के स्थान पर 'था' कहना पड़ेगा। आज क्या किया? सुबह थोड़ी देर से सुबह हुई। हर काम में थोड़ी - थोड़ी देरी हुई जैसे कि आज शाम भी थोड़ी देर से हुई लेकिन इस अलसाई सुबह में नाश्ते के बाद हुआ यह कि छत पर लेटे - लेटे याद किय... [पूरी पोस्ट]
writer sidheshwer
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[25 Dec 2009 12:10 PM]

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