प्रिय बिन बैरन-सी लगे पायल की झंकार
मंद पवन मादक मदन, प्रियतम भाव विभोर, पायल-ध्वनि मोहक लगे, शेष सबइ कछु शोर नयनन सोहे प्रीत रंग, प्रीत पवन चहुँ ओर टेसू बोते वेदना, विरहन पीर अछोर प्रिय बिन बैरन-सी लगे पायल की झंकार हाथ निवाला ले खड़ा ओंठ करे इनकार देह जगाए कामना, हाथ सजाते रूप दरपन त...
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गिरीश बिल्लोरे 'मुकुल'
दोहे
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[25 Dec 2009 09:36 AM]



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