कहता है दिल करे यूँ शिकायत कभी कभी
कहता है दिल करे यूँ शिकायत कभी कभी कहता है दिल करे यूँ,शिकायत कभी कभी उसमें भी हो छिपी-सी,मुहब्बत कभी कभी हो प्यार में अगरचे ,अदावत कभी कभी उस पर भी हम करें एक ,दावत कभी कभी इन्सां पे रब की हो यूँ, इनायत कभी कभी पहुंचे जो रूह तक भी ,राहत कभी कभी बन्द...
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योगेश स्वप्न
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[25 Dec 2009 07:07 AM]



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