चट्टान से मिटटी
चट्टान से मिटटी पत्थर से टकरा कर सर हर लहर लौट जाती है, क्यों कि निकलतीं हैं सागर के छिछले जल से, किन्तु चक्रवात आकर बहा ले जाता उसी चट्टान को, क्योंकि निकलता है महासागर के गंभीर ह्रदय से, तुम चट्टान ह़ो वही, निर्मम, कठोर, सर फोडती&nb...
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Blue Monk
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[25 Dec 2009 06:39 AM]



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