"चिट्ठा-जगत बन्द क्यों?" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

शब्दों का दंगल आज 25 दिसम्बर है, यानि बड़ा दिन। चिट्ठा-जगत पिछले 3 दिनों से बन्द पड़ा है। हिन्दी ब्लॉगरों के लिए यह चिन्ताजनक है। और हो भी क्यों नही। दुनिया रंग-रँगीली है। एक धुरऩ्धर महाशय ने तो अपना नाम ही ऐसा रख छोड़ा है कि "लिखते हुए भी लज्जा आती है।" " स्‍वामी... [पूरी पोस्ट]
writer डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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[25 Dec 2009 05:57 AM]

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