बंजारे हैं जाना होगा ( ग़ज़ल )
बंजारे हैं जाना होगा, जाने फिर कब आना होगा। बस उतनी ही देर रुकेंगे, जितना दाना-पानी होगा। शहर बड़ा पर दिल छोटे हैं, जाने कहाँ ठिकाना होगा। भूल गए वो चाहे हमको, लकिन हमें निभाना होगा। प्रियतम को देने की खातिर, कुछ तो यहाँ कमाना होगा। जिसने पथ में कांट...
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Hemant Snehi
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[25 Dec 2009 04:02 AM]



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