हुण मौजाँ ही मौजाँ

हँसते रहो   Hanste Raho राजीव तनेजा***   बात पिछले साल की है। चार दिन बचे थे , त्योहार आने में। मैं मोबाइल से दनादन ‘एस.एम.एस’ पे 'एस.एम.एस' किए जा रहा था। क्रिसमस का त्योहार जो सिर पर था लेकिन ये ‘एस.एम.एस’ मैं अपने खुदगर्ज़ दोस्तों को या फिर मतलबी रिश्तेदारों को... [पूरी पोस्ट]
writer राजीव तनेजा
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[25 Dec 2009 02:33 AM]

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