अस्तित्व

feminist poems मैं सोई थी मीठे सपनों में खोई थी उस गहरी नींद से जगा दिया मैंने अपने अस्तित्व को तुममें मिला दिया था तुमने ठोकर लगाकर मुझे मेरे अस्तित्व का एहसास करा दिया.... [पूरी पोस्ट]
writer mukti

अस्तित्‍व

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[24 Dec 2009 14:24 PM]

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