पीली घास

Kavi Sammelan पश्चिम से हवा ही ऐसी चली कि हम गुलाम हो गये हैं । संस्कारों में ये कैसा तेज़ाब भर गया है ? जिसने सबको जला डाला । अंकुरित फूल की जगह कंटीले झाड़ उग आये हैं । संगमरमर की दीवारों पे पीली घास उग आई है बीमार हूँ मैं , लेकिन घर के आँगन में धुओं के साये हैं... [पूरी पोस्ट]
writer AlbelaKhatri.com
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[24 Dec 2009 09:53 AM]

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