देश की जनता आर्थिक गुलाम बन कर रह गई है
भारत के गांवों में 80 फीसदी व शहरों में 30 फीसदी लोग आज भी खुले में शौच जाते हैं। सच यह भी है, आज भी भारत में लोग भूख से मर रहे हैं। सच यह भी है कि स्वयं को अन्नदाता कहलाने वाला किसान, सरकारी विकास के चक्रव्यूह में इस तरह फंस चुका है कि स्वयं ही मौत...
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हरिओम त्यागी
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[24 Dec 2009 08:10 AM]



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