हम तो आम हैं!!!
सुबह-सुबह छत पर आराम से बैठकर अखबार पड़ने का मौका नहीं मिलता, सो चलते वक्त बैग में रख लेता हूं और बस में अपनी सीट पर जमने के बाद पढ़ना शुरु करता हूं. आज भी ऐसा ही हुआ. खबरें और लेख देखते वक्त मेरी आखों के सामने दो ऐसी खबरें आईं, जिसे पढने के बाद लगा कि...
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विकास
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[24 Dec 2009 06:19 AM]



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