मैं भी कहाँ शिकायत कर रहा हूँ!

कच्‍चा चिट्ठा दफ्तरी जीवन से अवकाश प्राप्त करने के बाद अपनी दिनचर्या एकदम बदल गई है। सुबह देर से नींद खुलती है। आलस के मारे बिस्तर छोड़ते छोड़ते आठ तो बज ही जाते हैं। सुबह घूमने की इच्छा इच्छा ही रह गई है। आज दृढ़ निश्चय के साथ सुबह प्रात: भ्रमण के निकला तो वह दिख... [पूरी पोस्ट]
writer मथुरा कलौनी

व्यंग्य

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[24 Dec 2009 03:55 AM]

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