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भंगार आज तक यही देखा ....अपने सोचे कुछ नहीं होता ...जिस तरह नेचर चलता है ...वैसे ही हमें अपना जीवन चलने देना चाहिये .........जिस तरह से हम भूख लगने पे कुछ खाने को आतुर हो जाते हैं ....पर नहीं ......यही गलती हम अपने जीवन में करते हैं .........बस यही गलती हम... [पूरी पोस्ट]
writer भंगार
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[24 Dec 2009 02:39 AM]

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