एक ही लोग, पर दो व्यवहार, कैसे?

मंतव्य भारत हो और गंदगी ना हो ऐसा हो नहीं सकता. हमारे धार्मिक स्थानों से लेकर सार्वजनिक वाहनों, सड़कों, गलियों और मौहल्लों हर जगह गंदगी के ढेर दिखाई दे जाते हैं. नदियाँ नालियाँ बनी हुई है, और हम ऐसे ही जीने के अभ्यस्त हैं. लोगों का व्यवहार ही ऐसा हो गया है क... [पूरी पोस्ट]
writer पंकज बेंगाणी

विकाससमाजअहमदाबादआचार व्यवहारजनमार्गकांकरिया

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[24 Dec 2009 00:56 AM]

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