अभी तो .......
अभी तो व्यथा के श्रृंगों का आयतन वर्तनी की आकृतियॊं में नापता हूं ! ! ! भावना के पारावार में खो जायेगें दुख भी जब तुम्हारे स्मरण की विस्मृत मधुकरी तब मन के वातायनॊं पर सजाउंगा ! खो चुके संसार के आर्द्र स्वप्नों को अभी तो संतप्त चेतना के ताप से भूंजता...
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Aarjav
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[24 Dec 2009 00:12 AM]



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