"इसे अगर फांसी नहीं होगी तो बचेगा कैसे?"

शिवकुमार मिश्र  और ज्ञानदत्त पाण्डेय  का ब्लॉग बड़ा धोखा हो गया. मैंने कसाब को कव्वाल समझा और वो निकला एक्टर. क्या ज़माना आ गया है, किसी को कुछ समझिये और वो निकलता कुछ और है. बता रहा है कि मुंबई हीरो बनने आया था. स्ट्रगल करता उससे पहले ही पुलिस वालों ने पकड़ लिया और हीरो बनने के लिए कमर कस चुके नौज... [पूरी पोस्ट]
writer Shiv Kumar Mishra
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[23 Dec 2009 23:23 PM]

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